महाशिवरात्रि (Mahashivratri) हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन (विवाह) के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से महाशिवरात्रि की यह रात्रि अंधकार और अज्ञान पर विजय का प्रतीक मानी जाती है। यह दिन भक्ति, साधना और आत्मचिंतन का विशेष अवसर प्रदान करता है। महाशिवरात्रि 2026 रविवार, 15 फ़रवरी 2026 को मनाई जाएगी।
🌙 महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण रात्रि मानी जाती है। इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएँ हैं:
1️⃣ शिव–पार्वती विवाह
मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए इसे दिव्य मिलन की रात्रि भी कहा जाता है।
2️⃣ शिव के प्रकट होने की रात्रि
कुछ पुराणों के अनुसार इस दिन शिवजी ने शिवलिंग के रूप में प्रकट होकर सृष्टि के आदि और अंत का रहस्य बताया।
3️⃣ समुद्र मंथन और विषपान
समुद्र मंथन के समय निकले विष (हलाहल) को शिवजी ने ग्रहण किया था ताकि सृष्टि की रक्षा हो सके। उस त्याग की स्मृति में भी यह पर्व मनाया जाता है।
4️⃣ आध्यात्मिक ऊर्जा की रात
योग परंपरा के अनुसार यह रात साधना, ध्यान और जागरण के लिए सबसे शक्तिशाली मानी जाती है। कहा जाता है कि इस रात चेतना का स्तर स्वाभाविक रूप से ऊँचा होता है।
🕉️ महाशिवरात्रि पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
🔹 सुबह की तैयारी
- घर या मंदिर में पूजा स्थान तैयार करें
- ब्रह्ममुहूर्त में उठें
- स्नान करके साफ वस्त्र पहनें (सफेद या हल्के रंग)
- व्रत का संकल्प लें
🔹 पूजा सामग्री
- फल और प्रसाद
- जल / गंगाजल
- दूध, दही, शहद, घी, शक्कर (पंचामृत)
- बेलपत्र
- धतूरा, भांग (परंपरागत)
- चंदन, अक्षत (चावल)
- फूल
- दीपक, धूप
🔹 शिवलिंग अभिषेक विधि
- दीप और धूप जलाएँ
- शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ
- फिर पंचामृत से अभिषेक करें
- पुनः साफ जल से स्नान कराएँ
- चंदन लगाएँ
- बेलपत्र (3 पत्तियों वाला) चढ़ाएँ
- फूल और धतूरा अर्पित करें
🔹 मंत्र जप
- रुद्राष्टक या शिव चालीसा पाठ
- ॐ नमः शिवाय — सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र
- महामृत्युंजय मंत्र का जप
🔹 व्रत का नियम
- सात्विक भोजन ही लें (यदि व्रत तोड़ें)
- कई लोग निर्जल व्रत रखते हैं
- कुछ फलाहार करते हैं
- अनाज और नमक से परहेज़
🔹 रात्रि जागरण (जागरण का महत्व)
- महाशिवरात्रि की रात चार प्रहर की पूजा की जाती है:
- ध्यान और मौन साधना
- हर प्रहर में अभिषेक और मंत्र जप
- भजन, कीर्तन
Shiv Stuti – श्रावण शिव स्तुति
शिव चालीसा
महाशिवरात्रि का महत्व
- शिव-शक्ति का मिलन: माना जाता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान शिव ने वैराग्य छोड़कर माता पार्वती के साथ गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था।
- प्रलय की रात: एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी रात भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था, जो सृजन और विनाश का चक्र दर्शाता है।
- आध्यात्मिक ऊर्जा: वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रूप से माना जाता है कि इस रात पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में ऊर्जा का प्रवाह प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर होता है, इसलिए जागरण और ध्यान का विशेष महत्व है।
पूजन विधि और परंपराएं
- जलाभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी अर्पित करना।
- बेलपत्र का अर्पण: शिव जी को तीन पत्तों वाला बेलपत्र अत्यंत प्रिय है।
- उपवास और जागरण: भक्त दिन भर व्रत रखते हैं और रात भर शिव भजनों या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हैं।
- महामृत्युंजय मंत्र: आरोग्य और सुरक्षा के लिए इस मंत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
🔹 मुख्य मंत्र जप

Our Recent Blogs:
Sarvam AI Explained: How India Is Developing Its Own ChatGPT-Like AI
BNP’s Big Victory in Bangladesh: PM Modi Talks to Tarique Rahman, Calls for Peace and Progress
PM Modi Inaugurates New PMO ‘Seva Teerth’, Begins Work with Big Policy Decisions
#NamoNamo #mahashivratri #lordshiva











